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अलविदा बीते कुछ सालो को

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अलविदा बीते कुछ सालो को Bye Bye Few Years  बाय बाय सिर्फ इस साल को नहीं बाय बाय उन सारे सालों को जो अब तक मैं बिता चुका हूं  अलविदा सिर्फ बीते साल के लिए ही नहीं बल्कि उन सालों के लिए जो हमने देखे है शायद आगे आने वाली पीढ़ी वो लम्हा ही महसूस ना कर पाए मेरा मानना है कि , दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है,  हमारे बाद की किसी पीढ़ी को शायद ही  इतने बदलाव देख पाना संभव हो। हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिका जेट देखे हैं।  बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है ,  वर्चुअल मीटिंग जैसी  असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को सम्भव होते हुए देखा है।  मेरा धन्यवाद है उस साल के लिए जिसने कि मुझे यह सिखाया शादी में 50 लोगों से भी रस्मे निभाय जा सकती  है कोई जरूरत नहीं है एक लड़की के पिता के ऊपर पैसों का बोझ डालने और झूठा दिखावा करने का  हम वो पीढ़ी हैं जिन्होंने कई कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर , परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं हैं। जमीन पर बैठकर खाना खाया है। प्लेट में डाल डाल कर चाय पी है जिन्होंने बचपन में मोहल्...

दोहे का चमत्कार

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 दोहे का चमत्कार | नर्तकी की कहावत  एक दोहे में कहे गए शब्द किसी ग्रन्थ से काम नहीं होते है | एक दोहे में बहुत गहरी बात छुपी होती है | आप उस बात को समझ ली और अपने जीवन में उतार लें तो संभावनाओं के और कल्याण के नए रास्ते खुल सकते हैं | बस हमारी स्वयं की जागने की इच्छा होनी चाहिये  एक राजा था  जिसे राज भोग भोगते काफी समय हो गया था  बाल भी सफ़ेद होने लगे थे  एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा उत्सव में मुजरा करने वाली और अपने गुरु को बुलाया साथ ही दूर देश के अपने मिञ राजाओं को भी बुलवा लिया  राजा ने कुछ मुद्राएं अपने गुरु को दी कि, जो बात मुजरा करने वाली की अच्छी लगेगी वह मुद्रा उसे मेरा गुरु देगा  सारी रात मुजरा चलता रहा  सुबह होने वाली थीं, मुज़रा करने वाली ने देखा मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है उसको जगाने के लियें मुज़रा करने वाली ने एक दोहा पढ़ा बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिहाई  एक पलक के कारने, ना कलंक लग जाए  अब इस दोहे का अलग अलग व्यक्तियों ने अलग अलग अपने अपने अनुरूप अर्थ निकाला तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा जब ये बात गुरु ने...

ईनाम में घोडा़ चहिये या सेब

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  ईनाम में घोडा़ चहिये या सेब संसार स्त्री प्रधान ही है अगर आपको लगता है कि यह पूरी दुनिया पुरुष प्रधान है तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं यह कहानी आपकी इस गलतफहमी को दूर करने के लिए है कि संसार स्त्री प्रधान ही है | एक राजा था उसने एक सर्वे करने का सोचा कि मेरे राज्य के लोगों की घर गृहस्थी पति से चलती है या पत्नी सेउसने एक ईनाम रखा कि  जिसके घर में पति का हुक्म चलता हो, उसे मनपसंद घोडा़ ईनाम में मिलेगा और जिसके घर में पत्नी की चलती है वह एक सेब ले जाए एक के बाद एक सभी नगरवासी सेब उठाकर जाने लगे ।राजा को चिंता होने लगी क्या मेरे राज्य में सभी घरों में पत्नी का हुक्म चलता है इतने में एक लम्बी लम्बी मुछों वाला, मोटा तगडा़ और लाल लाल आखोंवाला जवान आया और बोला राजा जी मेरे घर में मेरा ही हुक्म चलता है घोडा़ मुझे दीजिए  राजा खुश हो गए और कहा जा अपना मनपसंद घोडा़ ले जाओ चलो कोई एक घर तो मिला जहाँ पर आदमी की चलती है जवान काला घोडा़ लेकर रवाना हो गया घर गया और फिर थोडी़ देर में घोडा लेकर दरबार में वापिस लौट आया। राजा क्या हुआ जवाँ मर्द  वापिस क्यों आ गये जवान  मह...

नए भारत का अनोखा आंदोलन

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 नए भारत का अनोखा आंदोलन New movement of India भिखारी को भिख में क्या देना है ये ही है एक अनोखा आंदोलन है अगर आप किसी जगह पर भिखारी को देखकर उसे भीख दे रहे हैं भिख में आप उसे पैसे दे रहे तो आप कितना बड़े अपराध के अनजाने में भागीदार बन रहे है ये आंदोलन आप को अपराध से बचायेगा और जरूरतमंद की मदद करने से भी नहीं रोकेगा  जब भी हम सड़क, मंदिर या ट्रैफिक सिगनल से होकर गुजर रहे होते हैं तो हमारी मुलाकात फटे पुराने कपड़े पहने, हाथ में कटोरा लिए भिखारी से हो जाती हैं. इस भखारी को देख कुछ लोग दया कर उनके कटोरे में चंद सिक्के डाल देते हैं. कुछ लोग इन्हें भीख देने के मूड में नहीं होते हैं लेकिन जब भिखारी उनके पीछे लग जाता है, बार बार विनती करता हैं तो उस से छुटकारा पाने के लिए ये लोग पैसे दे देते हैं. भीख मांगने वालों का अपना कारपोरेट घराना है। दुनिया तेजी से बदल रही है जनाब, कम लोग जानते होंगे चौक और ठिकाने भी भीख के लिए बंटे होते हैं। भिखारी माफिया सक्रिय है, वह एक चौक पर किसी नए भिखारी को नहीं आने देते। एक चौक पर अधिकतर वही भिखारी होता है, जो रोजाना बैठता है। नया कभी नहीं दिखता। ...

मुर्गे की बांग

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 मुर्गे की बांग   बिना बिचारे जो करे सो पीछे पछताए  यह कहानी उस समय की है जब घड़ी का आविष्कार नहीं हुआ था मुर्गे की बांग से ही सुबह का पता चलता था एक बुढि़या थी। उसका जीवन यापन अपने छोटे से खेत के अंदर सब्जियां उगा कर और बेचने से होता था उसके यहाँ दो नौकर थे। बुढि़या रोज सुबह मुर्गे की बांग देते ही उठ जाती थी। फिर वह अपने नौकरौ को जगाती और उन्हे काम पर लगा देती। नौकरो को सुबह इतनी जल्दी उठना पसंद नही था। वे दोनो हमेशा यही सोचा करते ऐसा कोई उपाय करना चाहिये। ताकि हम आराम से सो सके। एक दिन एक नौकर ने कहा, क्यो न हम सभी मुर्गो को मार डाले। न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी  यदि मालकिन सुबह मुर्गे की बांग नही सुनेगी तो जल्दी उठेगी कैसे। यदि वह सुबह जल्दी जाँगेगी नही तो हमें नींद से कौन उठाएगा | फिर हम चैन कीनीद सो सकेगे।  दूसरे नौकर को यह बात पसंद आ गई। दूसरे दिन दोनो नौकरो ने मिलकर मुर्गे को मार डाला। जब मुर्गा ही नही रहा तो बड़े सबेरे बाँग कौन देता? अब बुढि़या को सुबह उठने का समय नही पता चलता था।  इसलिए वह पहले की अपेक्षा और जल्दी उठ जाती थी। एक बार वह जग जात...

पंडित जी की गाय

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 पंडित जी की गाय  जल्दी का काम शैतान का एक पंडित जी थे। उनके पास एक मोटी ताजी दुधारू गाय थी। यह गाय किसी ने उन्हें दान में दी थी।  गाय के कारण घर में दूध, घी, दही की कमी नहीं होती थी। खा पीकर पंडित जी मोटे तगड़े होते जा रहे थे। एक शाम की बात है, पंडित जी जैसे ही दूध दुहने गोशाला पहुंचे तो गाय वहां से गायब मिली। खूंटा भी उखड़ा हुआ था। पंडित जी की जान सूख गई। उन्होंने सोचा, ”हो न हो गाय कहीं निकल भागी है। सो वह फौरन ढूंढ़ने निकल पड़े। थोड़ी दूर पर पंडित जी को एक गाय चरती हुई दिखाई दी। वह खुश हो गए।  लेकिन सांझ के झुरमुट में यह नहीं जान पाए कि जिसे वह अपनी गाय समझ बैठे हैं, वह पड़ोसी का मरखना सांड़ है।  उन्होंने लपककर ज्यों ही रस्सी थामी कि सांड़ भड़क उठा। जब तक सारी बात समझ में आती, देर हो चुकी थी।  सांड़ हुंकारता हुआ उनके पीछे दौड़ पड़ा। मोटे शरीर वाले पंडित जी हांफते हांफते गिरते पड़ते भाग खड़े हुए। भागते भागते उनका दम निकला जा रहा था और सांड़ था कि हार मानने को तैयार ही नहीं था।  आखिरकार एक गड्डा देखकर पंडित जी उसमें  कूद गए। सांड़ फिर भी न माना। पीछे पीछे वह भी...

कौन सा पति

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कौन सा पति -   शादी का कार्निवाल    kaun Sa Pati  - Shaadi Ka Carnival पांचवी मंजिल पर बैठकर मम्मी और पापा दोनों  आरोही को समझा रहे थे बेटा तेरी शादी की उम्र हो चली है हमने  शादी करो वेबसाइट पर तेरा रजिस्ट्रेशन भी कर दिया है अगर तू कोई अच्छा सा लड़का पसंद कर ले तो बस फिर हम शादी के सामान की साइट के साथ तेरे लिए अच्छा सा गार्डन और बाकी सामान भी खरीद लेते हैं अब वो जमाना नहीं रहा जब छोटे छोटे से मकान हुआ करते थे और कोई चाचा ताऊ हूं अपने आप लड़की के लिए लड़का देख लेता था और शादी पक्की हो जाती थी पहले घर छोटे हुआ करते थे पर आपस की खटपट और आपस का प्यार सब कुछ सुनाई देता | और आज बहुमंजिला इमारतों में रहते तो बहुत सारे लोग हैं पर वह प्यार अब नहीं रहा अब ना बगल वाले घर से कोई चीन नहीं मांगने जाता है और ना दही का जामन अब टेक्नोलॉजी का जमाना है | सब इंटरनेट पर मिलता है बस नहीं मिलता तो एक अच्छा पतिआप भी गूगल करेंगे तो देखेंगे जीतनी शादियां होती है  उन में अधिकतर तो टूट जाती है और इन्हीं सब साइटों पर जब आरोही और आरोही के पापा विजिट कर रहे थे  हर साइट पर...