शुरुवात
बहुत हो गया बस अब आज तो शुरुवात कर ही दूंगी,बस ये कहते हुए अलमारी से पेपर और पेन निकला ही था कि अदिश्री ने आवाज लगा दी। मम्मा ये बॉक्स खुल नहीं रहा, पेन और उस पेपर को वही बिस्तर पर पटक कर....
जो काम में लगी ,आज करीब ६ महीनो बाद याद आया मैंने लिखना शुरू करने का सोचा था।
मैं पिछले कई
सालो से लिखती आ रही हूँ। जब भी लिखा
हमेशा खुद के लिए ही लिखा , कई डायरिया भर दी
, कई पन्ने फाइल्स में कैद
कर लिए, पर अभी कुछ दिन
से ऐसा लगा क्यों न वो लिखा हुआ शेयर किया जाए सबके साथ |
ख़ास कर यहां Netherlands आने के बाद तो ऐसा लगता है कितना कुछ है बताने को।
जो लोग मुझे मेरे चैनल कि वजह से जानते है वो कहेंगे क्या अंकिता और क्या है जो शेयर करना है , पर सच लिखू तो वो १० से १२ मिनटो का Vlog और 30 सेकंड कि Reel में मैं कई बार अपने विचार,मन की बाते पूरी कर ही नहीं पाती सब कुछ limit में बंध जाता है।
